शिविर का उद्देश्य
माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती, जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग
एवं रसायन मुक्त कृषि को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में यह चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें
प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना था।
इस शिविर के माध्यम से किसानों को यह समझाया गया कि किस प्रकार कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है,
साथ ही मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण संतुलन और मानव स्वास्थ्य की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
मुख्य आकर्षण
जावद कृषि उपज मंडी में आयोजित इस शिविर में मध्य प्रदेश सहित देश के 8 राज्यों से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
शिविर स्थल पर विभिन्न 16 विभागों द्वारा अपनी-अपनी योजनाओं का विस्तृत प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया गया,
जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे विशेषज्ञों से प्राप्त हुई।
इसके साथ ही विभिन्न स्टॉल एवं प्रदर्शनी के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक उत्पादों,
और प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों को प्रदर्शित किया गया। विशेष रूप से कृषि में Artificial Intelligence (AI)
के उपयोग पर प्रस्तुति ने किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का कार्य किया।
मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शन
इस शिविर के उद्घाटन समारोह में प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
वहीं समापन समारोह (31 मार्च 2026) में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा जी ने किसानों को संबोधित किया।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि शिविर में प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में व्यवहारिक रूप से लागू करें,
जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने “कृषक कल्याण वर्ष 2026” का उल्लेख करते हुए बताया कि
राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए ₹90,000 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
मुख्य वक्ता पद्मश्री सुभाष पालेकर जी ने किसानों को रसायन मुक्त, जीरो बजट कृषि पद्धति के व्यावहारिक उपाय बताए।
उन्होंने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए देशी बीजों के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
सरकारी योजनाएँ और समर्थन
केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने तथा रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए
विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इनमें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग, परंपरागत कृषि विकास योजना,
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) तथा किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएँ प्रमुख हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है,
जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।
जावद क्षेत्र में विशेष पहल
इस प्रशिक्षण शिविर के साथ-साथ जावद क्षेत्र में कई नवाचारात्मक पहलें भी की जा रही हैं।
सरकारी स्कूलों में लगभग 1500 विद्यार्थियों को Artificial Intelligence (AI) की शिक्षा दी जा रही है,
जिनमें से 800 विद्यार्थी कृषि क्षेत्र में AI के उपयोग को सीख रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण अभियान एवं ग्रामीण स्तर पर सरकारी योजनाओं का
ऑनलाइन लाभ उपलब्ध कराने के प्रयास भी निरंतर जारी हैं, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
भविष्य की दिशा
माननीय प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के विजन से प्रेरित होकर जावद क्षेत्र के किसान
जीरो बजट एवं रसायन मुक्त खेती को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण
एवं आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
यह पहल “विकसित भारत @2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,
जो कृषि क्षेत्र को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।